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इतिहास के सबक़ · 2018
தூத்துக்குடி, 2018
22 मई 2018 को, स्टरलाइट तांबा संयंत्र के विरोध के 100वें दिन, तूतुकुडी कलेक्ट्रेट की ओर जा रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई। तेरह लोग मारे गए। बाद में एक न्यायिक आयोग ने फ़ायरिंग को बिना उकसावे का बताया; संयंत्र बंद हुआ, और 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिर खोलने से इनकार किया।
वेदांता का स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर तूत्तुकुडी के सिपकॉट क्षेत्र में 1990 के दशक के अंत में शुरू हुआ। वर्षों तक निवासियों और पर्यावरण समूहों ने वायु व जल प्रदूषण और नियम उल्लंघन की शिकायत की; कंपनी ने आरोपों को नकारा। फ़रवरी 2018 में संयंत्र विस्तार की योजना से धरना शुरू हुआ — कुमारेड्डियापुरम में जो पूरे शहर का आंदोलन बन गया।
100वें दिन, हज़ारों लोग संयंत्र को स्थायी रूप से बंद करने की माँग लेकर ज़िला कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। कलेक्ट्रेट के पास और थ्रेसपुरम जैसी जगहों पर पुलिस ने गोली चलाई।
सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज जस्टिस अरुणा जगदीशन के नेतृत्व में आयोग, 23 मई 2018 को नियुक्त, ने 2022 में सरकार को रिपोर्ट दी; रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई 18 अक्टूबर 2022 को। इसने गोलीबारी को पाया बिना उकसावे के और आत्मरक्षा में नहीं, कि पुलिस ने पहले कम कठोर उपाय अपनाने के नियमों का पालन नहीं किया, और ज़िम्मेदार ठहराया 17 पुलिसकर्मियों, तत्कालीन कलेक्टर और तीन राजस्व अधिकारियों को। इसने सिफ़ारिश की ₹50 लाख — हर पीड़ित परिवार के लिए (₹20 लाख पहले ही दिए जा चुके थे) और अधिकारियों पर कार्रवाई।
संविधान राज्य से भी कहता है कि पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे (अनुच्छेद 48क), और हर नागरिक से भी (अनुच्छेद 51क(छ))। सुप्रीम कोर्ट स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को शामिल मानता है — अनुच्छेद 21.
तथ्य 18 अक्टूबर 2026 को ऊपर दिए स्रोतों से जाँचे गए। जहाँ स्रोतों में किसी संख्या या तारीख़ पर अंतर है, हम बताते हैं। कोई ग़लती दिखी? हमें बताएँ.